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9 घंटे पहले

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विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील, 'साइबर कानूनों से समृद्ध', पुस्तक के लेखक - Dainik Bhaskar

विराग गुप्ता, सुप्रीम कोर्ट के वकील, ‘साइबर कानूनों से समृद्ध’, पुस्तक के लेखक

संसद में ऐतिहासिक कानून पारित होने के समय बहस के बजाय विपक्षी सांसद मिमिक्री विवाद में पड़कर निलंबित हो बैठे हैं। केंद्र सरकार भी महत्वपूर्ण कानूनों को फाइनल करने से पहले राज्यों के साथ ठोस परामर्श नहीं कर रही है।

मुक्त अर्थव्यवस्था की आड़ में टेक और टेलीकॉम कंपनियों को फ्री हैंड देने से स्वदेशी उद्यम, रोजगार सृजन और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं की अनदेखी करना ठीक नहीं है। सरकार को यह समझने की जरूरत है कि औपनिवेशिक कानूनों को बदलने के चक्कर में संकट के नए दलदल बनने से विकसित भारत का सपना गड़बड़ा सकता है। इसके पांच पहलुओं को समझें।

1. संसदीय समिति की 52वीं रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की सर्वसम्मत कानूनी परिभाषा नहीं होने की वजह से बाल श्रम के खिलाफ लड़ाई कमजोर है। उसी तरह से नए अधिनियम में टेलीकॉम की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने से कानूनी जिम्मेदारी पूरी किए बगैर टेक महारथी आर्थिक दोहन का राजमार्ग बना लेंगे।

ट्राई द्वारा जारी परामर्श पत्र के अनुसार पिछले साल जारी ड्राफ्ट में व्हाट्सएप, स्काइप और टेलीग्राम आदि को कानून के दायरे में लाने की बात कही गई थी। लेकिन विदेशी टेलीकॉम कंपनियों की लॉबीइंग के बाद नए कानून के दायरे से ओटीटी सर्विसेज को बाहर करने से अर्थव्यवस्था को भारी क्षति होगी। अधिनियम में लाइसेंस शब्द को खत्म करके अथॉराइजेशन शब्द का इस्तेमाल है। निजी क्षेत्र के व्यक्ति को मुखिया बनाए जाने के कानून से संचार जैसे सामरिक क्षेत्र में देश की सार्वभौमिकता कमजोर हो सकती है।

2. नए कानून में फ्रॉड, चीटिंग और अन्य अपराधों के लिए 3 साल की सजा और 50 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन सिम कार्ड के लिए केवाईसी का नियम और अनचाहे कॉल के खिलाफ जुर्माने के प्रावधान तो कई सालों से कानून की किताबों में कैद हैं।

इन सभी अपराधों की जड़ में डाटा की संगठित चोरी है। इसे खत्म करने के लिए ठोस नियम बनना बाकी हैं। संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पिछले 10 सालों में नियम नहीं बने। लेकिन सैटेलाइट इंटरनेट और अंतरिक्ष क्रांति के फेर में नए कानून के तहत नियम बन सकते हैं।

3. आपातकालीन परिस्थितियों में संचार प्रणाली में हस्तक्षेप और अधिग्रहण के लिए सरकार के पास कानूनी अधिकार होना ही चाहिए। जो लोग प्राइवेसी के सीमित पहलू से नए कानूनों की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें टेलीकॉम कम्पनियों की जासूसी पर भी निगाह रखने की जरूरत है।

कॉक्स मीडिया ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और गैजेट्स में लगे माइक हमारी बातचीत को सुनकर विज्ञापन का एल्गोरिदम तय कर रहे हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक गूगल मैप में 6 करोड़ एक्टिव यूजर्स पांच करोड़ रोजाना सर्च कर रहे हैं। मैप में 3000 शहरों के लगभग 30 करोड़ भवन व 3 करोड़ व्यावसायिक स्थल चिह्नित हैं। बायोमेट्रिक और दूसरे डाटा का दुरुपयोग रोकने के लिए व्यावहारिक रोडमैप को नए कानून में शामिल करना चाहिए।

4. नए कानून के तहत सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन नीलामी के बजाय प्रशासनिक निर्णय से होगा। इससे एलॉन मस्क की स्टार लिंक, अमेजॉन की कुइपर और एयरटेल की वन वेब कम्पनियों को विशेष फायदा होगा। नए कानून में स्पेक्ट्रम को सरेंडर करने के साथ 4-जी वाले स्पेक्ट्रम का 5-जी में इस्तेमाल की अनुमति का प्रावधान है। टेलीकॉम सेक्टर का भारत की जीडीपी में 9% योगदान है। इसके बावजूद बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसी सरकारी कम्पनियों का बेड़ा गर्क है।

5. अभी कांग्रेसी सांसद के यहां से 350 करोड़ की नगदी मिलने के बाद छिटपुट ही हलचल हुई। लेकिन तीन दशक पहले संचार मंत्री सुखराम के यहां से लगभग 3.61 करोड़ की नगदी मिलने पर सियासत में तूफान सा आ गया था। उसके बाद कैग की रिपोर्ट में स्पेक्ट्रम आवंटन से 1.76 लाख करोड़ के नुकसान के दावे ने यूपीए सरकार की कब्र खोद दी।

नीरा राडिया टेप और ए. राजा की गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल गरमा गया था। 2-जी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपीए के स्पेक्ट्रम आवंटन को सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी ठहराते हुए 100 से ज्यादा टेलीकॉम लाइसेंसों को रद्द कर दिया था। इस विवाद के बाद भारत में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या डेढ़ करोड़ से बढ़कर 88.1 करोड़ हो गई है। टेलीकॉम की भारी क्रांति के बावजूद स्पेक्ट्रम से सरकारी खजाने की आमदनी नहीं बढ़ी है।

सरकार महत्वपूर्ण कानूनों को फाइनल करने से पहले राज्यों से परामर्श नहीं कर रही। मुक्त अर्थव्यवस्था की आड़ में टेक और टेलीकॉम कंपनियों को फ्री हैंड देने से स्वदेशी उद्यम, रोजगार सृजन और राष्ट्रीय सुरक्षा की अनदेखी हो रही है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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