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1 दिन पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

क्या आप ऐसे किसी को जानते हैं, जिन्हें लंबे वक्त से खांसी हो और चंद हफ्ते से ज्यादा हो गए हों? हालांकि शुरुआती उपचार के बाद कुछ राहत होगी, लेकिन चंद दिनों बाद ही यह पूरी ताकत से लौटी होगी? क्या डॉक्टर ने मरीज से यथासंभव घर के अंदर रहने के लिए कहा है, ताकि प्रदूषण या किसी तरह के संक्रमण के संपर्क में ना आएं? घबराएं नहीं।

इस लंबी-सूखी खांसी से अकेले वह ही पीड़ित नहीं हैं! कई अस्पतालों के डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसे मरीज बढ़ रहे हैं। सामान्य फ्लू या वायरल के लक्षण आमतौर पर कुछ दिन में धीमे पड़ जाते हैं। लेकिन डॉक्टर्स द्वारा सामान्य संक्रमण के पर्याप्त उपचार के बावजूद हाल के हफ्तों में लंबी खांसी के मरीज मिल रहे हैं।

रुटीन दवाओं के बावजूद खांसी ठीक नहीं हो रही है, जिससे मरीज की नींद पर असर पड़ रहा है। डॉक्टर्स का कहना है कि ये हालात वयस्कों और 65 साल से ऊपर के लोगों में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं, खासतौर पर डायबिटीज़, हाइपरटेंशन, गंभीर ब्रॉन्काइटिस, अस्थमा पीड़ितों में।

पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़े व सांस रोग विशेषज्ञ) के मुताबिक लंबे समय तक खांसी के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं जैसे बार-बार संक्रमण, ठंडा मौसम, सामाजिक दूरी नहीं रखना, ज्यादा प्रदूषण और संक्रमण में तेजी। और कोविड-19 संबंधी प्रतिबंध हटने के बाद जिस तरह से सावधानियां रखना छोड़ दी गईं, इससे शायद परेशानी और बढ़ी हो और बैक्टीरिया के साथ द्वितीयक संक्रमण का कारण बन रहा हो, जो लंबे समय तक खांसी का कारण बनता है।

इस मंगलवार को इंसाकोग को BA.2.86 (संक्षिप्त नाम पिरोला) के वंशज जेएन.1 के 20 सीक्वेंस मिले हैं- 18 गोवा से और एक-एक महाराष्ट्र और केरल से- कुछ दिन पहले केरल में इस सब-वैरिएंट का पहली बार पता चलने के बाद से देश में पिछले नौ दिनों में कोविड मरीजों की संख्या दोगुनी (938 से 1970) हो गई है।

पिछले 24 घंटों में केरल में 292 नए मरीज मिले हैं, जिनमें तीन की मौत हो गई। भारतीय सार्स सीओवी-2 जिनोमिकी संगठन (इंसाकोग) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद व भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के साथ संयुक्त रूप से शुरू किया गया है।

यह जीनोमिक विकास की निगरानी के लिए 54 प्रयोगशालाओं का संघ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सब-वैरिएंट के कारण अमेरिका सहित विभिन्न देशों में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं। जेएन.1 पश्चिमी देशों में सबसे तेजी से बढ़ता वैरिएंट है।

एशिया में इसके मामले इंडोनेशिया और थाइलैंड में भी सामने आ रहे हैं। यह अप्रैल 2023 में आई हालिया लहर के दौरान इंसाकोग इंडिया द्वारा रिपोर्ट किए गए एक्सबीबी सीक्वेंस की बड़ी संख्या की तुलना में एक पूरे नए वैरिएंट के बारे में बताता है।

और अब पूरे सात महीने बाद देश में कोविड फिर बढ़ रहा है। पल्मोनोलॉजिस्ट मानते हैं कि बहुत ज्यादा प्रदूषण और ठंड ने स्थिति और गंभीर कर दी है। देश के तीन राज्यों में मिल रहे नए मरीजों को देखते हुए अब हमें खुद का ध्यान रखने की जरूरत है।

हम क्या करें? सुनिश्चित करें कि अगर घर पर कमजोर इम्यूनिटी वाला व्यक्ति है, गंभीर बीमारी वाले बुजुर्ग, गर्भवती महिला हैं तो सार्वजनिक जगहों पर वह मास्क पहनें, नए वैरिएंट से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग रखें। सबको हाथों की सफाई का ख्याल रखना होगा, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ भीड़भाड़ वाली और सटकर बनी सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचें।

संक्रमित और गैर-संक्रमित दोनों के लिए एहतियात के तौर पर संक्रमित लोगों को घर पर ही आइसोलेट करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उबला पानी पीने व ताजे पके स्वच्छ भोजन की आदत है, तो 80% समस्याओं से वैसे ही बच जाएंगे।

फंडा यह है कि डॉक्टर के परामर्श के हिसाब से अपनी सुरक्षा रखने के साथ खांसने-छींकने के एटीकेट रखें (पर्याप्त रुमाल और हैंड टॉवल रखें) और जो ऐसा नहीं करते, उनसे दूर रहें।

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